सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र के मामले को संविधान पीठ को भेजा सकता है या 30 नवंबर से पहले फ्लोर टेस्ट कराने को कह सकता है

Tue, 26 Nov 2019 04:49:37 GMT

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गठबंधन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल से मुलाकात कर 162 विधायकों के समर्थन का दावा किया

इनमें शिवसेना के 56, राकांपा के 53 (अजित पवार को छोड़कर), कांग्रेस के 44 और अन्य 11 विधायक

Dainik Bhaskar Nov 26, 2019, 10:19 AM IST

नई दिल्ली से संतोष कुमार. महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच मंगलवार का दिन महत्वपूर्ण रहेगा। सुप्रीम कोर्ट फ्लोर टेस्ट के मुद्दे पर फैसला सुनाएगा। शीर्ष अदालत इस मामले में अंतरिम फैसला सुना सकती है या 30 नवंबर से पहले फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश भी दे सकती है। ऐसी स्थिति में क्या तस्वीर बनेगी, यह जानने के लिए भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से बात की।

शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा की क्या संभावना है?

शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा के महाविकास आघाड़ी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिलने की उम्मीद कम है, क्योंकि यह न तो चुनाव पूर्व गठबंधन है, न ही इसने पहले कभी सरकार बनाने का दावा किया था।

मौजूदा स्थिति : इस गठबंधन ने सोमवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल से मुलाकात कर 162 विधायकों के समर्थन का दावा किया। इनमें शिवसेना के 56, राकांपा के 53 (अजित पवार को छोड़कर), कांग्रेस के 44 और अन्य 11 विधायक हैं।

अगर अंतरिम फैसला आया तो क्या होगा?

अंतरिम फैसला आने पर यह मामला आगे बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार और सभी पक्षों को औपचारिक जवाब और हलफनामा दायर करके प्रोसीडिंग्स पूरी करनी होंगी, जिसमें समय लगेगा। बहस के दौरान की गई मांग के अनुसार इस मामले में उठाए गए कानूनी बिंदुओं को विस्तृत सुनवाई के लिए संविधान पीठ के के पास भी भेजा जा सकता है।

तीनों दलों ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की है?

शिवसेना और उसके साथी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से मुख्यतः 4 मांगें की गई हैं। पहली- विधानसभा में 24 घंटे के भीतर बहुमत परीक्षण हो। दूसरी- विधानसभा में सिर्फ यही एक एजेंडा हो। तीसरी- वाेटिंग मत विभाजन से और खुले मतदान के जरिए हो। चौथी- निष्पक्षता के लिए बहुमत परीक्षण की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हो।

30 नवंबर की तारीख का क्या होगा?

फ्लोर टेस्ट के लिए 30 नवंबर की तारीख की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट इस तारीख को स्वीकार करने या फिर इसे और पहले कराने का निर्देश दे सकती है।

क्या स्पीकर के चयन में भी शक्ति परीक्षण होगा?

वोटिंग और अन्य प्रक्रियाओं पर सुप्रीम कोर्ट निर्देश दे भी सकती है या फिर इन मुद्दों को स्पीकर के विशेषाधिकार पर छोड़ा जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि विधानसभा के गठन के बाद स्पीकर के चुनाव में ही दोनों धड़ों के बीच शक्ति परीक्षण हो जाएगा, जिसके बाद बहुमत परीक्षण की जरूरत शायद ही पड़े?

अगर अजित पवार का ही व्हिप माना गया?

भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि अगर सदन में अजित पवार को ही राकांपा का नेता माना गया और व्हिप जारी करने का अधिकार उन्हीं के पास रहा तो शरद पवार शायद ही अपने समर्थक विधायकों पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता गंवाने को कहेंगे। ऐसी स्थिति में विधानसभा के फ्लोर पर फडणवीस-अजित पवार सरकार बहुमत साबित कर देगी। आने वाले समय में राकांपा के कोटे से कुछ नेता केंद्र में मंत्री भी बन सकते हैं।

वोटिंग का गणित : प्रोटेम स्पीकर ने अगर अजित पवार को राकांपा विधायक दल का नेता माना और उनके व्हिप के खिलाफ राकांपा के 53 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की तो उनके वोट अमान्य हो जाएंगे। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा: 119 रह जाएगा। भाजपा-अजित पवार को सिर्फ 13 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।

अगर सुप्रीम कोर्ट ने तारीख नहीं दी तो क्या होगा?

भास्कर को भाजपा से मिली जानकारी के मुताबिक, अगर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में बहुमत साबित करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं कि तो देवेंद्र फडणवीस सरकार अपना बहुमत पहले से निर्धारित 30 नवंबर को ही साबित करेगी। भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने पहले की समय सीमा दी तो भी उसे बहुमत साबित करने में कोई कठिनाई नहीं आने वाली। भाजपा यह मानकर चल रही है कि राकांपा सुप्रीमो शरद पवार का मास्टर स्ट्रोक अभी नहीं आया है, जो इस पूरे घटनाक्रम को नया स्विंग देगा। आखिरकार शरद पवार भी मान जाएंगे क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित करने का मसला न सिर्फ राजनीतिक, बल्कि तकनीकी पहलुओं में भी फंसेगा। यह भाजपा के पक्ष में जाता दिख रहा है।

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