डीप समुद्र में चलने वाला रोबर बनाया, यह बृहस्पति के चांद यूरोपा की बर्फ के नीचे एलियन खोजेगा

Tue, 26 Nov 2019 01:49:34 GMT

Go to Homepage

दो पहियों और दो कैमरे वाला यह रोबर ब्रुई डिवाइस की मदद से एक बार चार्ज करने पर महीनों तक चल सकता है

नेविगेशन वाले रोबर को ब्रुई सही स्थिति में रखती है और तलछट में सैंपलिंग के वक्त ऊर्जा खपत बंद कर देती है

Dainik Bhaskar Nov 26, 2019, 07:19 AM IST

वॉशिंगटन. नासा ने गहरे समुद्र में चलने वाला रोवर बनाया है। इसे बृहस्पति के चांद यूरोपा की बर्फ के नीचे एलियन के जीवन से जुड़ी खोज के लिए तैयार किया गया है। दो पहियों और दो कैमरे वाला यह रोवर एक बार चार्ज करने पर महीनों तक चल सकता है। इसकी टेस्टिंग अंटार्कटिका स्थित ऑस्ट्रेलिया के केसी रिसर्च स्टेशन की सतह पर की जा रही है। बर्फीले समुद्र के तल में चलने के लिए इसे नेविगेशन सिस्टम से लैस किया गया है।

बुओएंट रोवर फॉर अंडर-आइस एक्सप्लोरेशन (ब्रुई) डिवाइस लगी है। ब्रुई इसे पानी के अंदर सही स्थिति में रखती है। यह किसी तरह के सैंपल एकत्रित करते समय एनर्जी की खपत को बंद कर देती है। वैज्ञानिकों की ज्यादा रुचि ब्रुई के इस्तेमाल में इसलिए है, क्योंकि यह बर्फ और पानी की सतह को पहचान सकती है।

बर्फ का रसायन जीवन के लिए मददगार

नासा के वैज्ञानिक केविन हैंड के मुताबिक, ‘‘बर्फ के गोले महासागरों की खिड़की की तरह काम करते हैं। बर्फ का यह रसायन महासागरों के अंदर जीवन को बरकरार रखने में मददगार है। यहां धरती पर बर्फ ने ऐसी ही भूमिका निभाई है। हमारी टीम का विशेष रुझान यह जानने में हैं कि जहां बर्फ और पानी मिलते हैं वहां क्या हो रहा है। ’’

ब्रुई सबसे बड़ी उपलब्धि

शोधकर्ताओं के मुताबिक, नासा 2025 में जुपिटर मिशन है। इसके लिए वह यूरोपा क्लिपर लॉन्च करेगा। इसका आखिरी उद्देश्य कक्षा में ग्रह और उसके चांद यूरोपा की रीडिंग और फोटो लेना है। इस मिशन के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि ब्रुई डिवाइस है, जो स्वतंत्र रूप से कई महीनों तक बिना किसी ऊर्जा के संचालित होती है। यह पानी का तापमान, खारापन और ऑक्सीजन का लेवल भी माप सकती है। ये तीनों तत्व धरती पर जीवन के उदय और विकास के आधार हैं, लेकिन अब वैज्ञानिक उपकरण को दूसरे ग्रहों पर अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल करना चाहते हैं।

To read more visit: https://www.bhaskar.com/interesting/news/deep-sea-made-robber-it-will-find-alien-under-the-ice-of-jupiters-moon-europa-126134296.html

Go to Homepage

The news is rendered from www.bhaskar.com. This site is a non-commercial attempt to provide news in places with slow-internet connectivity especially in rural areas. While the site design is licensed under MIT License, the news content is a copyright property of www.bhaskar.com. The code for the site is available on Github. Site logo under CC 3.0 BY by Designmodo.
Site created by Parth Parikh